डीजीसीए (DGCA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल के महीने में भारतीय घरेलू एयरलाइंस ने कुल 1.38 करोड़ से कुछ ज्यादा यात्रियों को सफर कराया। यह आंकड़ा मार्च के महीने में दर्ज किए गए 1.44 करोड़ यात्रियों के ट्रैफिक के मुकाबले 4.2 प्रतिशत कम रहा है। केवल इतना ही नहीं, यदि पिछले साल के अप्रैल महीने (1.43 करोड़ यात्री) से तुलना की जाए, तो इस साल का ट्रैफिक 3.47 प्रतिशत कम दर्ज किया गया है।
साल की शुरुआती छमाही में मामूली बढ़त
अगर जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच के कुल आंकड़ों पर नजर डालें, तो इस अवधि के दौरान घरेलू एयरलाइंस ने सामूहिक रूप से 575.49 लाख यात्रियों को अपनी सेवाएं दीं। यह पिछले साल की इसी समान अवधि की तुलना में महज 0.06 प्रतिशत की मामूली सालाना बढ़ोतरी (YoY) को दर्शाता है।
एविएशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस सुस्ती के पीछे कई बड़ी वजहें हैं:
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अचानक से हवाई यात्रा की मांग (Demand) में कमी आना।
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अंतरराष्ट्रीय कारणों से विमान ईंधन (ATF) की बढ़ती कीमतें।
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उड़ानों के शिड्यूल में हो रहे लगातार बदलाव और ऑपरेशनल दबाव।
इंडिगो की बादशाहत बरकरार, एयर इंडिया पिछड़ी
यात्रियों की कुल संख्या में गिरावट आने के बावजूद, देश की सबसे बड़ी बजट एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) ने बाजार में अपनी हिस्सेदारी को और मजबूत किया है।
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IndiGo: कंपनी ने अप्रैल में अपना मार्केट शेयर 63.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 65 प्रतिशत कर लिया है।
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Air India Group: दूसरी ओर, टाटा के स्वामित्व वाले एयर इंडिया ग्रुप की बाजार हिस्सेदारी में गिरावट देखी गई, जो 26.2 प्रतिशत से घटकर 24.7 प्रतिशत पर आ गई।
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Akasa Air: इस नई एयरलाइन ने मामूली सुधार के साथ बाजार में 5.8 प्रतिशत की हिस्सेदारी हासिल की।
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SpiceJet: वित्तीय संकट से जूझ रही स्पाइसजेट का मार्केट शेयर और ज्यादा फिसलकर मात्र 3.4 प्रतिशत रह गया है।
समय की पाबंदी (OTP) में भी इंडिगो आगे
चारों मुख्य मेट्रो एयरपोर्ट्स पर उड़ानों के सही समय पर संचालन (On-Time Performance - OTP) के मामले में भी IndiGo 88.5 प्रतिशत स्कोर के साथ नंबर वन पायदान पर रही। इसके बाद क्रमशः एयर इंडिया ग्रुप और अकासा एयर का स्थान रहा।
देरी और उड़ानें रद्द होने से यात्री परेशान
इस महीने के दौरान खराब मौसम और ऑपरेशनल वजहों से यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। डीजीसीए की रिपोर्ट के अनुसार, 1.35 लाख से ज्यादा यात्री उड़ानों में होने वाली देरी (Delay) से प्रभावित हुए। इसके अलावा, 77,000 से अधिक यात्रियों को उड़ानें रद्द (Cancel) होने के कारण अपनी यात्रा टालनी या बदलनी पड़ी। इन सभी रुकावटों के चलते एयरलाइंस को मुआवजे, रिफंड और अन्य सुविधा शुल्क के रूप में यात्रियों को कई करोड़ रुपए का भुगतान करना पड़ा है।