कानपुर न्यूज डेस्क: आईआईटी कानपुर में जनवरी में हुए छात्रों की आत्महत्या के मामलों की जांच के लिए शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति अभी तक अपनी रिपोर्ट पूरी नहीं कर पाई है। गौरतलब है कि समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए दी गई समय सीमा बीते दो महीने से अधिक का वक्त हो चुका है, जिसके कारण अब समिति ने औपचारिक रूप से समय सीमा बढ़ाने की मांग की है।
जनवरी में तीन सप्ताह के भीतर परिसर में हुई दो आत्महत्याओं के बाद मंत्रालय ने एक उच्च स्तरीय पैनल बनाया था। इसमें नेशनल एजुकेशनल टेक्नोलॉजी फोरम के अध्यक्ष प्रो. अनिल डी. सहस्रबुद्धे, मूलचंद अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. जितेंद्र नागपाल और शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त सचिव रीना सोनोवाल कौली शामिल हैं। पैनल को 7 फरवरी तक भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों और सिफारिशों के साथ रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था।
सूत्रों के अनुसार, जांच दल ने आईआईटी कानपुर का व्यक्तिगत दौरा करने के साथ-साथ तीन वर्चुअल बैठकें भी की हैं। रिपोर्ट में देरी का मुख्य कारण अन्य संस्थानों में भी लगातार हो रही आत्महत्या की घटनाएं बताई जा रही हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट को अधिक व्यापक बनाने की कोशिश की जा रही है। बताया गया है कि रिपोर्ट का एक ड्राफ्ट तैयार है, लेकिन इसमें कुछ महत्वपूर्ण संशोधन और अतिरिक्त जानकारियां जोड़ी जानी बाकी हैं।
इस समिति को शिक्षा मंत्रालय के 'Framework Guidelines for Emotional Well-Being of Students in Higher Educational Institutions' (उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के भावनात्मक कल्याण के लिए रूपरेखा दिशा-निर्देश) के कार्यान्वयन की समीक्षा करने का कार्य भी सौंपा गया है। राज्यसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 2018 से 2023 के बीच उच्च शिक्षण संस्थानों में 98 छात्रों ने आत्महत्या की, जिनमें से 39 छात्र अकेले आईआईटी (IITs) से थे। फिलहाल, शिक्षा मंत्रालय ने इस देरी के संबंध में पूछे गए सवालों का कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है।