कानपुर न्यूज डेस्क: कानपुर में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट कांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब तक 50 से 60 से अधिक अवैध ट्रांसप्लांट की आशंका जताई जा रही है। जांच में सामने आया है कि पूरा ऑपरेशन बेहद सुनियोजित तरीके से किया जाता था, जिसमें अस्पताल का सामान्य स्टाफ हटा दिया जाता था और विशेष टीम बुलाकर बिना रिकॉर्ड के सर्जरी कराई जाती थी।
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब शहर के आरोही हॉस्पिटल पर छापा मारकर उसे सील किया गया। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ते हुए आहूजा हॉस्पिटल तक पहुंचा, जहां से कई अहम सुराग मिले। पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और बेहद गोपनीय तरीके से काम कर रहा था।
जांच में एक बड़ा नाम शिवम अग्रवाल उर्फ काना का सामने आया, जो महज आठवीं पास है और पहले एम्बुलेंस चालक था। वह खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों को इस रैकेट में फंसाता था। वहीं मेरठ के एक डॉक्टर अफजाल द्वारा टेलीग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डोनर और रिसीवर को जोड़कर सौदे तय किए जाते थे, जिससे इस नेटवर्क के डिजिटल और अंतरराज्यीय कनेक्शन का खुलासा हुआ है।
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू मरीजों की हालत है। एक महिला मरीज ने करीब 80 लाख रुपये खर्च कर ट्रांसप्लांट कराया, लेकिन लापरवाही के चलते उसकी हालत गंभीर हो गई और उसे SGPGI रेफर करना पड़ा। वहीं डॉक्टरों का कहना है कि सही देखभाल और संक्रमण से बचाव न होने के कारण मरीजों की जान खतरे में पड़ गई।
पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें अस्पताल संचालक, डॉक्टर और अन्य सहयोगी शामिल हैं। हालांकि जांच एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और इस रैकेट का असली नेटवर्क अभी पूरी तरह सामने आना बाकी है।