कानपुर न्यूज डेस्क: आईआईटी कानपुर में पिछले तीन वर्षों में सामने आए 10 से अधिक आत्महत्या के मामलों ने संस्थान को गंभीर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। इन घटनाओं की जांच के बाद बनी समिति ने पाया कि हॉस्टल कमरों की कुछ संरचनाएं जोखिम को बढ़ाती हैं। इसी के आधार पर अब संस्थान ने बड़े स्तर पर बदलाव लागू करने का निर्णय लिया है, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
सबसे अहम बदलाव के तहत अब हॉस्टल कमरों के पंखों में स्प्रिंग-लोडेड डिवाइस लगाई जाएगी। इस तकनीक के जरिए यदि कोई पंखे का सहारा लेकर आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश करेगा, तो वजन पड़ते ही पंखा नीचे गिर जाएगा और प्रयास विफल हो जाएगा। इस तरह कमरे का सामान्य उपकरण भी अब सुरक्षा का हिस्सा बन जाएगा।
इसके अलावा, कमेटी ने पर्दों में लगे मजबूत पाइप और छत पर मौजूद अन्य पाइपों को भी संभावित खतरे के रूप में चिन्हित किया है। इन्हें हटाकर उनकी जगह हल्की नायलॉन की डोरियों का उपयोग किया जाएगा, ताकि छात्र अपनी जरूरतें भी पूरी कर सकें और जोखिम भी कम हो। संस्थान अब हर छोटे-बड़े ढांचे की सुरक्षा के लिहाज से समीक्षा कर रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय किसी एक घटना का परिणाम नहीं, बल्कि लगातार हुई घटनाओं के गहन विश्लेषण के बाद लिया गया है। करीब 15 हॉस्टल और 9 हजार से अधिक छात्रों वाले इस कैंपस में अब सुरक्षा को नए दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। आईआईटी कानपुर का यह कदम संकेत देता है कि संस्थान अब केवल कारणों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि ठोस रोकथाम के उपायों पर भी सक्रियता से काम कर रहा है।